हिंदी फिल्म इंडस्ट्री का असल जिंदगी की अपराध कहानियों से हमेशा गहरा रिश्ता रहा है। मुंबई का अंडरवर्ल्ड, जो कभी डोंगरी की संकरी गलियों तक सीमित था और बाद में दुबई के नेटवर्क तक फैल गया, सिनेमा को लगातार ऐसे किरदार और कथानक देता रहा है, जो पर्दे पर आते ही दर्शकों के दिमाग में अमिट छाप छोड़ जाते हैं। इसी कड़ी में अब एक बार फिर हुसैन उस्तारा का नाम सुर्खियों में आया है। इसकी वजह है नई फिल्म 'ओ रोमियो', जिसका निर्देशन विशाल भारद्वाज ने किया है। इस फिल्म में शाहिद कपूर ‘उस्तारा’ नामक किरदार में नजर आएंगे। हालांकि मेकर्स ने साफ किया है कि फिल्म किसी की बायोपिक नहीं है, फिर भी किरदार और पृष्ठभूमि में हुसैन उस्तारा की जिंदगी से मिलती-जुलती झलकें आसानी से देखी जा सकती हैं। यही वजह है कि पुराने अंडरवर्ल्ड का यह नाम एक बार फिर चर्चा में है।
भारतीय सिनेमा हमेशा उन कहानियों की ओर आकर्षित हुआ है, जिनमें संघर्ष, नाटकीयता और भावनात्मक गहराई हो। अंडरवर्ल्ड की दुनिया में वफादारी, विश्वासघात, प्रेम और हिंसा जैसे तत्व स्वाभाविक रूप से पाए जाते हैं। हुसैन उस्तारा की कहानी भी इन्हीं विरोधाभासों से भरी रही है, एक तरफ अपराध की दुनिया, दूसरी ओर व्यक्तिगत रिश्तों की जटिलताएं। फिल्म ओ रोमियो भी इसी मिश्रण को बड़े पर्दे पर जीवंत करने की कोशिश करती नजर आती है। भले ही फिल्म आधिकारिक रूप से काल्पनिक बताई जा रही हो, दर्शक इसके किरदारों में वास्तविक घटनाओं की परछाईं तलाशने से खुद को रोक नहीं पाते।
फिल्म में शाहिद कपूर एक हिटमैन की भूमिका निभा रहे हैं, जिसका नाम उस्तारा है। पेशे से वह बेरहम और खतरनाक है, लेकिन कहानी में मोड़ तब आता है जब वह अफ्शा नाम की लड़की से प्रेम करने लगता है। अफ्शा का किरदार त्रिप्ति डिमरी निभा रही हैं। यह कहानी रोमांस और हिंसा का संगम पेश करती है, एक ऐसा संयोजन जो दर्शकों को लंबे समय से आकर्षित करता आया है। टीजर में शाहिद का किरदार खून से सना, भावनात्मक रूप से टूटता और भीतर से संघर्ष करता नजर आता है। दर्शकों ने फिल्म के टीजर के बाद तुरंत इसे असली हुसैन उस्तारा से जोड़ना शुरू कर दिया। खासकर उस लेयर्ड रिश्ते पर ध्यान गया, जिसमें एक खतरनाक आदमी और एक मजबूत, भावनात्मक रूप से जटिल महिला का संबंध दिखाया गया, जो कई लोगों को सपना दीदी की याद दिलाता है। फिलहाल निर्माताओं का कहना है कि ओ रोमियो पूरी तरह काल्पनिक कहानी है। यह वास्तविक घटनाओं से प्रेरित जरूर है, लेकिन किसी एक व्यक्ति की जीवनी नहीं है।
अगर हुसैन की कहानी विरोध की थी तो सपना दीदी की कहानी बदले की थी। उनका शुरू में ऑर्गनाइज्ड क्राइम से कोई लेना-देना नहीं था। उनके पति महमूद खान को दाऊद इब्राहिम के गैंग ने मार दिया। यह घटना उनके जीवन को पूरी तरह बदल गई। सपना दीदी ने पीछे नहीं हटने का फैसला किया और खुद को फिर से सशक्त बनाया। वे उसी अपराध की मशीनरी में घुसीं जिसने उनके जीवन को उजाड़ा था और उसे चुनौती दी। इस बदलाव में हुसैन उस्तारा ने अहम भूमिका निभाई। रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने सपना दीदी को कड़ी ट्रेनिंग दी, फिजिकल लड़ाई, मोटरबाइक चलाना और हथियार चलाने में सटीकता। साथ मिलकर उन्होंने ऐसे प्लान बनाए कि अंडरवर्ल्ड और लॉ एनफोर्समेंट दोनों हिल गए।
सपना दीदी की कहानी का सबसे साहसी अध्याय था शारजाह में क्रिकेट मैच के दौरान दाऊद इब्राहिम को मारने का कथित प्लान। यह योजना असफल रही। 1994 में सपना दीदी को बेरहमी से मार दिया गया। उनकी मौत बदले के मिशन का हिंसक अंत थी और मुंबई के ऑर्गेनाइज्ड क्राइम इतिहास में यह एक यादगार, लेकिन दुखद अध्याय बन गई। हुसैन उस्तारा और सपना दीदी के बारे में लोग जो कुछ भी जानती है, वह इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म और क्राइम राइटिंग के माध्यम से आया है। एस. हुसैन जैदी की किताब 'डोंगरी टू दुबई' में उन्हें अंडरवर्ल्ड का अहम खिलाड़ी बताया गया है।
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